हनुमान जी की आरती हिंदी में | Hanuman Ji Ki Aarti in Hindi Lyrics, Meaning, PDF
हनुमान जी की आरती हिंदी में (Hanuman Ji Ki Aarti in Hindi) संपूर्ण पाठ और पंक्तिवार हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। गोस्वामी तुलसीदास जी रचित प्रसिद्ध आरती 'आरती कीजै हनुमान लला की' (Hanuman Ji Ki Aarti) के संपूर्ण बोल (Lyrics), पूजन विधि, अद्भुत लाभ एवं नि:शुल्क PDF डाउनलोड।
श्री हनुमान जी की आरती हिंदी में | Hanuman Ji Ki Aarti in Hindi
| ॥ श्री हनुमान जी की आरती (आरती कीजै हनुमान लला की) ॥ |
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आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।। |
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अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।। |
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लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।। |
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लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।। |
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बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।। |
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कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गााई।। |
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जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
॥ इति श्री हनुमान जी की आरती संपूर्णम् ॥ |
श्री हनुमान जी की आरती Audio / Video (Listen & Watch)
हनुमान जी की आरती पंक्तिवार हिंदी अर्थ | Meaning in Hindi
| क्र. | आरती की पंक्तियाँ (Aarti Hanuman Ji Ki) | सरल हिंदी अर्थ एवं व्याख्या |
|---|---|---|
| १ |
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। |
भगवान श्रीराम के कला-स्वरूप तथा दुष्टों का संहार करने वाले बाल हनुमान जी की आरती उतारें। |
| २ |
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।। |
जिनके अपरंपार बल और पराक्रम से बड़े-बड़े पर्वत भी कांपने लगते हैं और जिनके निकट आते ही सभी प्रकार के रोग, दोष एवं नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं। |
| ३ |
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।। |
माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी अत्यंत बलशाली हैं। वे अपने भक्तों और संतानों के कष्टों में सदैव उनकी सहायता करते हैं। |
| ४ |
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।। |
जब भगवान श्रीराम ने उन्हें बीड़ा (दायित्व) देकर भेजा, तो उन्होंने समुद्र पार करके लंका को दहन कर दिया और माता सीता की सुध (समाचार) लाकर दी। |
| ५ |
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।। |
लंका जैसा मजबूत किला और समुद्र जैसी विशाल गहरी खाई होने के बावजूद, पवनपुत्र हनुमान जी को वहां जाने में तनिक भी देर न लगी। |
| ६ |
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।। |
उन्होंने पूरी लंका को भस्म कर दिया, दुष्ट राक्षसों का संहार किया और भगवान श्री सीताराम जी के सभी बिगड़े काम संवार दिए। |
| ७ |
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।। |
जब युद्ध में लक्ष्मण जी मूर्छित होकर गिर पड़े थे, तब हनुमान जी द्रोणाचल पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा की। |
| ८ |
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।। |
जब अहिरावण राम-लक्ष्मण को पाताल ले गया, तब हनुमान जी पाताल लोक में प्रवेश करके यमराज के दूतों का दमन किया और अहिरावण की भुजा उखाड़कर उसका वध किया। |
| ९ |
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।। |
हनुमान जी अपनी बाईं भुजा से दुष्ट असुरों के दल का संहार करते हैं और अपनी दाहिनी भुजा से भक्तों तथा संतजनों का कल्याण एवं उद्धार करते हैं। |
| १० |
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।। |
देवता, मनुष्य और मुनिगण सभी मिलकर हनुमान जी की आरती उतारते हैं और 'जय जय जय हनुमान' के जयकारे लगाते हैं। |
| ११ |
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।। |
सोने की थाली में कपूर की उज्ज्वल ज्योति जगाकर स्वयं माता अंजनी अपने महान पुत्र हनुमान जी की आरती उतार रही हैं। |
| १२ |
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गााई।। |
भगवान श्रीराम की कृपा से हनुमान जी ने लंका का विध्वंस किया। गोस्वामी तुलसीदास जी प्रभु हनुमान जी की इसी पावन कीर्ति और महिमा का गान करते हैं। |
| १३ |
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।। |
जो कोई भी निष्ठापूर्वक हनुमान जी की यह आरती गाता है, वह वैकुंठ धाम में निवास प्राप्त करता है और मोक्ष रूपी परमपद को पाता है। |
हनुमान जी की आरती का इतिहास एवं महत्व
हनुमान जी की यह प्रसिद्ध आरती 'आरती कीजै हनुमान लला की' की रचना महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। तुलसीदास जी ने प्रभु श्री राम और हनुमान जी की अनंत महिमा का गान अपने काव्यग्रंथों में किया है।
इस आरती में हनुमान जी के महान पराक्रमों—जैसे लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना, अहिरावण वध और श्रीराम काज संवारने की पावन लीलाओं का सुंदर वर्णन है। भक्तिभाव से हनुमान जी की आरती गाने से व्यक्ति जीवन के सभी कष्टों, भय, रोगों और दुःखों से मुक्त हो जाता है।
हनुमान जी की आरती के लाभ | Benefits of Hanuman Aarti
१) भय एवं संकट से मुक्ति
नियमित आरती गाने से भूत-प्रेत, भय एवं नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
२) रोगों एवं कष्टों का निवारण
हनुमान जी की कृपा से असाध्य रोग, बीमारियां एवं शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।
३) बिगड़े काम संवरना
जीवन में रुके हुए और कठिन कार्य हनुमान जी के आशीर्वाद से शीघ्र पूर्ण होते हैं।
४) संतान की रक्षा एवं सुख
हनुमान जी 'संतान के प्रभु सदा सहाई' हैं, वे बच्चों एवं संतान की रक्षा करते हैं।
५) बल और बुद्धि की प्राप्ति
साधक को शारीरिक बल, मानसिक शांति, बुद्धि और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
६) परमपद बैकुंठ की प्राप्ति
आरती के अंत में कहा गया है कि जो आरती गाता है वह अंतकाल में वैकुंठ परमपद पाता है।
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Download PDF (Hindi)हनुमान जी की आरती पाठ के नियम एवं पूजा विधि | Rules
हनुमान जी की आरती (Aarti Hanuman Ji Ki) करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन करें:
- पवित्रता: स्वच्छ स्नान करके लाल या पी वस्त्र धारण करें।
- दीपक: तांबे या पीतल के दीपक में कपूर या चमेली के तेल की बत्ती जलाएं।
- आरती चक्र: हनुमान जी के चरणों में 4 बार, नाभि पर 2 बार, मुख पर 1 बार और संपूर्ण शरीर पर 7 बार आरती घुमाएं।
- समय: मंगलवार और शनिवार की सुबह और संध्या आरती का विशेष फल मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र. हनुमान जी की आरती 'आरती कीजै हनुमान लला की' के रचयिता कौन हैं?
उ. हनुमान जी की आरती 'आरती कीजै हनुमान लला की' गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखी है।
प्र. हनुमान जी की आरती (Hanuman Aarti) करने का सबसे सही समय क्या है?
उ. हनुमान जी की आरती प्रतिदिन प्रातःकाल और संध्याकाल में कपूर या दीपक जलाकर की जा सकती है।
प्र. हनुमान जी की आरती (Aarti Hanuman Ji Ki) गाने से क्या लाभ होता है?
उ. सभी प्रकार के रोग, दोष, भय, शत्रुओं का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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