हनुमान गायत्री मंत्र हिंदी में | Hanuman Gayatri Mantra, Dhyan & Trikal Vandana

हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra), हनुमान ध्यान (Hanuman Dhyan) एवं हनुमान त्रिकाल वंदना (Hanuman Trikal Vandana) संपूर्ण हिंदी अर्थ, चमत्कारी लाभ, जप विधि एवं नि:शुल्क PDF डाउनलोड। भगवान श्री हनुमान जी से बल, बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करने का अमोघ वैदिक मंत्र।

हनुमान गायत्री मंत्र, ध्यान एवं त्रिकाल वंदना | Text & Lyrics

॥ श्री हनुमान ध्यानम् (Shri Hanuman Dhyanam) ॥
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्।
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्॥
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
॥ श्री हनुमान गायत्री मंत्र (Shri Hanuman Gayatri Mantra) ॥
॥ ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
(Om Anjaneyaya Vidmahe Vayuputraya Dhimahi, Tanno Hanumat Prachodayat)

अन्य गायत्री रूप:
॥ ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि। तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्॥
॥ ॐ अञ्जनिसुताय विद्महे महाबलाय धीमहि। तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्॥
॥ श्री हनुमान त्रिकाल वंदना (Shri Hanuman Trikal Vandana) ॥
१) प्रातः वंदना (Morning Vandana):
प्रातः स्मरामि हनुमन् अनन्त-वीर्यं श्री राम-चन्द्र चरणाम्बुज चञ्चरीकम्।
लङ्कापुरी-दहन नन्दित-देववृन्दं सर्वार्थ-सिद्धि-सदनं प्रथित-प्रभावम्॥

२) मध्याह्न वंदना (Midday Vandana):
मध्याह्ने भजामि भवतारकमञ्जनेयं सिद्धाश्रमस्थितमभीष्टवरप्रदं तम्।
सीताशुचां शमनहेतुमपारवीर्यं कल्पद्रुमं सकलकामफलप्रदं तम्॥

३) सायं वंदना (Evening Vandana):
सायं भजामि शरणोपस्मृताखिलािर्तपुञ्जप्रणाशनविधौ प्रथितप्रतापम्।
अक्षान्तकं सकलराक्षसवंशधूमकेतुं प्रमोदितविदेहसुतं दयालुम्॥
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हनुमान गायत्री मंत्र एवं त्रिकाल वंदना अर्थ | Verse Meaning in Hindi

हनुमान गायत्री मंत्र अर्थ (Hanuman Gayatri Mantra Meaning): जैसे माँ गायत्री का मंत्र बुद्धि और ज्ञान का प्रकाश फैलाता है, ठीक उसी प्रकार हनुमान गायत्री मंत्र साधक के हृदय में अभय, ज्ञान, वाक्-शक्ति और सात्विक ऊर्जा का संचार करता है। त्रिकाल वंदना द्वारा प्रातः, मध्याह्न और सायं तीनों काल में हनुमान जी का ध्यान किया जाता है।

क्र. मंत्र / वंदना श्लोक हिंदी अर्थ एवं व्याख्या (Meaning)
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥ गायत्री मंत्र अर्थ: हम माता अंजनी के पुत्र श्री अंजनेय का ध्यान करते हैं, पवनदेव के पुत्र वायुपुत्र का मनन करते हैं। वे महावीर हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग, ज्ञान और साहस की ओर प्रेरित करें।
ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि। तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्॥ द्वितीय गायत्री रूप: हम भगवान श्री राम के परम दूत का ध्यान करते हैं, कपियों के राजा कपिराज का मनन करते हैं। वे मारुति नंदन हनुमान हमारी प्रज्ञा और विचार शक्ति को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
प्रातः स्मरामि हनुमन् अनन्त-वीर्यं श्री राम-चन्द्र चरणाम्बुज चञ्चरीकम्... प्रातः वंदना अर्थ: जो असीम शक्ति धारण करने वाले, श्रीरामचंद्र जी के चरण कमलों के भौंरे समान अनन्य भक्त, लंका दहन कर देवों को आनंद देने वाले और सर्व सिद्धियों के दाता हैं, उन हनुमान जी का मैं प्रातःकाल स्मरण करता हूँ।
मध्याह्ने भजामि भवतारकमञ्जनेयं सिद्धाश्रमस्थितमभीष्टवरप्रदं तम्... मध्याह्न वंदना अर्थ: जो भवसागर से पार उतारने वाले, माता अंजनी के पुत्र, भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए कल्पवृक्ष समान और माता सीता के दुखों का शमन करने वाले हैं, उन महावीर हनुमान जी की मैं मध्याह्न काल में वंदना करता हूँ।
सायं भजामि शरणोपस्मृताखिलािर्तपुञ्जप्रणाशनविधौ प्रथितप्रतापम्... सायं वंदना अर्थ: जो शरण में आए भक्तों के समस्त दुखों का नाश करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने रावणपुत्र अक्षकुमार का वध किया और राक्षस वंश के लिए धूमकेतु समान हैं, उन दयालु हनुमान जी की मैं सायंकाल में वंदना करता हूँ।

हनुमान गायत्री मंत्र Audio / Video (Listen & Watch)

हनुमान गायत्री मंत्र का रहस्य एवं त्रिकाल साधना

गायत्री मंत्र को सनातन धर्म में सभी मंत्रों का मुकुटमणि माना गया है। हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) व्यक्ति के शरीर में स्थित अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को जाग्रत करता है, जिससे अकारण लगने वाला भय, घबराहट और मानसिक तनाव तुरंत शांत हो जाता है।

त्रिकाल वंदना (Trikal Vandana) का अर्थ है दिन के तीनों प्रहरों—प्रातःकाल (सूर्यस्त से पूर्व), मध्याह्नकाल (दोपहर) और सायंकाल (सूर्यास्त के समय)—में हनुमान जी की विशेष स्तुति करना। त्रिकाल वंदना करने से भक्त को चौबीसों घंटे हनुमान जी का अभय संरक्षण प्राप्त होता है।

हनुमान गायत्री मंत्र के लाभ | Hanuman Gayatri Mantra Benefits

१) बुद्धि, विवेक और प्रखर ज्ञान

हनुमान जी ज्ञानियों में अग्रगण्य हैं। इस गायत्री मंत्र के पाठ से स्मरण शक्ति, मेधा बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

२) अकारण भय और चिंता से मुक्ति

अनाहत चक्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने से घबराहट, एंग्जायटी, रात्रि भय और अवसाद से तुरंत राहत मिलती है।

३) शारीरिक एवं मानसिक ऊर्जा में वृद्धि

साधक के शरीर में दिव्य ओज और ऊर्जा का संचार होता है, जिससे आलस्य और बीमारियां दूर भागती हैं।

४) त्रिकाल सुरक्षा कवच

त्रिकाल वंदना का नियमित पाठ करने से तीनों काल में सब प्रकार की दुर्घटनाओं, गृह-क्लेश और संकटों से रक्षा होती है।

५) वाक्-सिद्धि और वाणी में प्रभाव

साधक की वाणी प्रभावशाली बनती है, जिससे साक्षात्कार, परीक्षा और सार्वजनिक भाषणों में सफलता मिलती है।

६) भक्ति, बल एवं कार्य सिद्धि

श्रीरामचंद्र जी की अनन्य भक्ति प्राप्त होती है तथा जीवन के जटिल कार्य हनुमान जी के आशीर्वाद से सुगम हो जाते हैं।

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हनुमान गायत्री मंत्र जप विधि एवं नियम | Rules & Vidhi

हनुमान गायत्री मंत्र और त्रिकाल वंदना करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन करें:

  • पवित्रता एवं स्वच्छता: स्नान करके स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  • सर्वप्रथम गणेश स्मरण: जप प्रारंभ करने से पूर्व भगवान गणेश का ध्यान करें, फिर श्री हनुमान ध्यानम् का पाठ करें।
  • दीपक एवं माला: चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और रुद्राक्ष की माला से 108 बार जप करें।
  • त्रिकाल समय: त्रिकाल वंदना प्रातः सूर्योदय के समय, मध्याह्न दोपहर 12 बजे के आसपास और सायं सूर्यास्त के समय करें।
  • विशेष दिन: मंगलवार और शनिवार को यह पाठ करना अत्यंत विशेष फलदायी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्र. हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) कौन सा है?

उ. मुख्य हनुमान गायत्री मंत्र है: 'ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥'

प्र. हनुमान त्रिकाल वंदना क्या होती है?

उ. त्रिकाल वंदना में प्रातःकाल, मध्याह्नकाल और सायंकाल में हनुमान जी के श्लोकों का पाठ कर तीनों काल में उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

प्र. हनुमान गायत्री मंत्र के मुख्य लाभ (Benefits) क्या हैं?

उ. इससे अकारण भय और चिंता दूर होती है, बुद्धि-विवेक बढ़ता है, एकाग्रता मजबूत होती है और कार्य सिद्धि मिलती है।

प्र. हनुमान गायत्री मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?

उ. प्रतिदिन 108 बार (1 माला) रुद्राक्ष की माला से जप करना सर्वोत्तम होता है।

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